छात्रों की जान जा रही है, फिर भी सरकार की चुप्पी क्यों?

NEET 2026 पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। अपने भविष्य और न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा और झड़पों की खबरों ने पूरे देश को चिंता में डाल दिया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा इतना गंभीर मामला सामने आया है, जब प्रदर्शन हिंसक हो चुके हैं और छात्र अपनी जान तक जोखिम में डालकर सड़कों पर उतर रहे हैं, तो सरकार की ओर से अब तक स्पष्ट और ठोस जवाब क्यों नहीं दिया जा रहा?

छात्रों की मांग है कि NEET 2026 से जुड़े कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में हुई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो। प्रदर्शनकारी जिम्मेदारी तय करने और परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार की मांग कर रहे हैं। लेकिन सवाल सिर्फ परीक्षा का नहीं है। सवाल उन छात्रों का है जिन्होंने वर्षों तक मेहनत की। सवाल उन परिवारों का है जिन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी पूरी जिंदगी की कमाई लगा दी। और सवाल उस व्यवस्था का है, जिसमें गलती होने पर सबसे ज्यादा नुकसान हमेशा छात्रों को ही उठाना पड़ता है।
अगर सब कुछ सही है, तो सरकार छात्रों के सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रही?

अगर कोई गलती हुई है, तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हो रही? और अगर छात्रों की आवाज सड़क पर उतरने के बाद भी नहीं सुनी जाएगी, तो वे आखिर अपनी बात किसके सामने रखें?

आज देश के लाखों छात्र सिर्फ जवाब मांग रहे हैं-उनके भविष्य के साथ हुए कथित अन्याय का जिम्मेदार कौन है?

सरकार को इस पूरे मामले पर चुप्पी तोड़नी होगी। क्योंकि यह सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं है—यह लाखों छात्रों के भविष्य और देश की परीक्षा व्यवस्था पर भरोसे का सवाल है।

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